उत्तर प्रदेश के कानपुर में रायपुरवा में दवा कारोबारी और भाजपा पार्षद के बीच हुए मारपीट का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इसमें विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना गुट के लोग पार्षद के समर्थन में खुलकर सामने आ गए है, जबकि दवा कारोबारी के पक्ष में व्यापारी और सिख संगठनों के लोग धरना प्रदर्शन करने लगे हैं। शनिवार देर रात कार को ओवरटेक करने को लेकर भाजपा पार्षद सौम्या शुक्ला, उनके पति अंकित शुक्ला का हैलट के सामने परफेक्ट सर्जिकल के मालिक अमोल दीप सिंह भाटिया से विवाद हो गया था।दोनों पक्षों में बीच सड़क पर जमकर लात घूंसे चले, जिसमें अमोल दीप गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिनका इलाज दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में चल रहा है। दोनों पक्षों के इस घटना लेकर अपने-अपने तर्क और आरोप हैं। बताया जा रहा है कि भाजपा पार्षद के पति अंकित शुक्ला महाना के विधानसभा से आते हैं और उन्हीं के प्रभाव से भाजपा से पार्षद का टिकट भी उनकी पत्नी को मिला।व्यापारियों का आरोप है कि महाना गुट के दबाव की वजह से पुलिस पार्षद पति को गिरफ्तार करने से बच रही है। साथ ही इस मामले में पार्षद पति के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने में भी पुलिस ने 18 घंटे का समय लगा दिया। पुलिस के महाना पक्ष के दबाव में आने की बात कारोबारियों ने पहले तो दबी जुबान में कहना शुरू किया था, लेकिन एक दिन पहले जब महाना के निजी सचिव राकेश तिवारी पार्षद सौम्या शुक्ला व उनके पति अंकित शुक्ला के समर्थन में पुलिस कमिश्नर से मिलने पहुंचे थे। सतीश महाना एक दिन पहले विदेश यात्रा पर चले गए हैं। बताया जा रहा है कि सतीश महाना ने पुलिस को यह हिदायत दी है कि दोनों पक्षों की बात सुनी जाए, उसके बाद ही कोई फैसला लिया जाए। लोग हैं, जो भाजपा की छवि धूमिल कर रहे हैं।यशोदानगर में रहने वाले अंकित शुक्ला माता-पिता की इकलौती संतान हैं। उनके पिता सुनील कुमार शुक्ला वर्ष 2020 में जिला पंचायत कार्यालय औरैया से अकाउंटेंट के पद से सेवानिवृत्त हुए। बीटेक पास अंकित को राजनीति में जाने का शौक उसकी मां प्रमिला शुक्ला से मिला। वर्ष 2012 में प्रमिला ने इसी वार्ड से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पार्षद का चुनाव लड़ा, लेकिन हार गईं थीं। उनके इसी सपने को पूरा करने के लिए अंकित ने राजनीति की ओर रुख किया। बताया जा रहा है उनके राजनीति में यहां तक पहुंचने में सतीश महाना का वरदहस्त रहा है।सतीश महाना के निजी सचिव राकेश तिवारी के अनुसार अंकित शुक्ला ने पुलिस आयुक्त डॉ. आरके स्वर्णकार से मिलकर बताया था कि थार गाड़ी में सवार दवा व्यापारी व कुछ लोग शराब के नशे में थे। पार्षद की गाड़ी को आगे नहीं आने दे रहे थे। महिला पार्षद ने इसका विरोध किया तो उन लोगों ने अभद्रता की। महिला पार्षद का हाथ खींचने लगे और मारपीट भी की। इससे महिला के हाथ में भी चोट आई है। उन्होंने पुलिस आयुक्त से शिकायत की है कि पुलिस एकतरफा कार्रवाई कर रही है। दवा कारोबारी और भाजपा पार्षद पति के बीच हुई मारपीट के मामले में एक तीसरा पक्ष भी है,जो इसे तूल दे रहा है। बताया जा रहा है कि दवा कारोबार और पार्षद के पक्ष में जो लोग पैरवी कर रहे हैं, उसमें दोनों तरफ ही भाजपा के लोग शामिल हैं। इसका फायदा उठाकर एक तीसरा पक्ष जो भाजपा से जुड़ा नहीं है, वह मामले को बढ़ाने में लगा है। इस तीसरे पक्ष पर भाजपा नेताओं ने भी आरोप लगाया है। कहा है कि कुछ ऐसे


































