मध्य प्रदेश के उज्जैन में सावन के पांचवें सोमवार के मौके पर आज बाबा महाकाल की पांचवी शाही सवारी निकलेगी। आज भक्तों को पांच रूपों में बाबा महाकाल के दर्शन होंगे। बाबा महाकाल पंचम सवारी में पालकी में श्री चन्द्रमौलेश्वर, हाथी पर श्री मनमहेश, गरुड़ रथ पर शिवतांडव, नंदी रथ पर उमा-महेश और डोल रथ पर होल्कर स्टेट के मुखारविंद विराजित होकर अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकलेंगे। महाकालेश्वर भगवान की सवारी निकलने के पहले महाकाल मंदिर के सभामंडप में भगवान श्री चन्द्रमौलेश्वर का विधिवत पूजन-अर्चन होगा। उसके बाद भगवान श्री चन्द्रमौलेश्वर पालकी में विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे। मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल के जवान पालकी में विराजित भगवान को सलामी देंगे। उसके बाद सवारी परंपरागत मार्ग महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार और कहारवाड़ी से होती हुई रामघाट पहुंचेगी। जहां शिप्रा नदी के जल से भगवान का अभिषेक और पूजन-अर्चन किया जाएगा। इसके बाद सवारी रामानुजकोट, मोढ की धर्मशाला, कार्तिक चौक खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी बाजार से होती हुई वापस महाकालेश्वर मंदिर पहुंचेगी। बाबा महाकाल की पांचवी सवारी को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। सवारी के दौरान कोई अप्रिय घटना घटित ना हो, सवारी अपने पूर्ण वैभव के साथ परंपरागत मार्गों से निकले इसी मंशा से आसमान से लेकर जमीन तक पुलिस का कड़ा पहरा सवारी के दौरान रहेगा। भगवान महाकाल की सवारी को लेकर इस बार सुरक्षा इंतजाम और बढ़ाए गए हैं। सवारी मार्ग की लगभग 40 ऊंची बिल्डिंग की छत से भी पुलिस पूरे सवारी इंतजाम पर नजर रखेगी। सभी छत पर दूरबीन लिए पुलिसकर्मी नजर आएंगे, वहीं अन्य जिलों से यहां पदस्थ हुए नए निरीक्षकों को भी सवारी मार्ग के संवेदनशील व भीड़ के दबाव वाले स्थानों पर टीम के साथ लगा दिया गया है। सोमवार सुबह से सवारी मार्ग के इंतजाम के लिए फोर्स को बुलवा लिया गया है। आईजी संतोष कुमार सिंह ने पिछली सवारी की समीक्षा के बाद सुरक्षा इंतजाम बढ़ाने के साथ ही हाइराइज भवनों की छतों से निगरानी पर जोर दिया था, जिसके बाद ऊंचे भवन की संख्या बढ़ाते हुए इनके 40 प्वाइंट किए गए हैं, ताकि प्रॉपर व्यवस्था पर नजर रहे। इसके अलावा सवारी में पिछली बार साढ़े तीन लाख लोग व भजन मंडलियों में तय संख्या से अधिक सदस्यों के चलते पालकी को धीरे चलाना पड़ा था, जिसके चलते पालकी एक से सवा घंटे लेट मंदिर पहुंची थी। इस बार भजन मंडली में गेप न रहे और व्यवस्था सतत चलायमान रखने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।


































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