उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में ऐसे में शहर के आम लोगों के अलावा कई बुद्धिजीवियों और करोड़पतियों ने आवास विकास पर भरोसा किया। करीब 29 सालों में यहां के सात सेक्टरों में छोटे-बड़े करीब 4000 प्लॉट व कॉलोनी का आवंटन हो गया। हालांकि आवास विकास ने यहां करीब पांच किमी. के दायरे में सड़कों व नालियों का निर्माण कराया था, लेकिन अब यह इतने जर्जर हो चुके हैं कि यह यहां की बदहाली का सबसे बड़ा कारण बन चुके हैं। जन कल्याण समिति ने इस बदहाली को दूर कराने का वीणा उठा लिया है। समिति तब तक संघर्ष करेगी, जब तक समाधान नहीं होता।
औरैया। आवास विकास कॉलोनी की रंगत बदलने के लिए जहां यहां रहने वाले आम लोग परेशान हैं। वहीं नेताओं ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। फिर भी कॉलोनी की सूरत नहीं बदली। अफसर आते ही नहीं इसे दुर्भाग्य ही कहेंगे कि कई प्रयासों के बावजूद आवास विकास के अफसर सीवरेज लाइन तक नहीं डलवा सके। आवास विकास का यहां न कोई दफ्तर है और न अधिकारी आते हैं।आवास विकास कॉलोनी की जनकल्याण समिति को यहां की बदहाली से निजात दिलाने में पसीने छूट रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार हैं कि बिना सीवरेज के हस्तांतरण को लेकर अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़े हैं।
तीन दशक पहले शहर के कानपुर रोड किनारे आवास विकास कॉलोनी विकसित की गई थी। उस वक्त यहां के लोगों को आवास विकास परिषद ने खूब सपने दिखाए थे। मसलन कॉलोनी में सीवरेज, सड़क, पेयजल के साथ आकर्षक पार्क आदि की सुविधा मिलेगी।कहने को तो इसे पॉश कॉलोनी कहा जाता है, लेकिन यहां की सुविधाएं गांव से भी बदतर हैं। जलभराव, चोक नालियां और खस्ताहाल सड़कें यहां की पांच हजार आबादी के लिए नासूर बन चुकी हैं।

































