अनंतकाल से दानव और देवताओं के मध्य एक युद्ध चला आ रहा है लेकिन कलयुग में दानव दोनों ही मानव शरीर के अंदर है, देवत्व यानि उदारता और सहिष्णुता, सम्मान और त्याग वही दानवता मतलब लालच, क्रोध, असहिष्णुता और अपमान नागबंधम फिल्म वास्तव में दानवो और देवताओ के बीच इसी लड़ाई पर आधारित है।
प्राचीन काल से ही मंदिर शिक्षा, चिकित्सा, भोजन और आश्रय का आधार रहे है, साथ ही संकट काल में राज्य की अर्थव्यवस्था को सहयोग करने वाले बैंक भी, क्युकी मंदिर की संपत्ति कोई भी अपने व्यक्तिगत प्रयोग में नहीं लाता था इसीलिए धन सम्पदा यहाँ सुरक्षित रह सकती थी, लेकिन मंदिर की सम्पदा की रक्षा राजा ने कभी सैन्य बल नहीं दिया।
यानि मंदिर को आपकी सुरक्षा स्वयं करनी पड़ती थी वो भी बिना बाहरी दिखावे के, क्युकी बहरी दिखावा होगा तो चोरो का डर और भी ज्यादा होगा, इसीलिए मंत्रो से खजाने की सुरक्षा की जाती थी।
फिल्म नागबंधम में यही पद्द्ति को बहुत अच्छे ग्राफिक्स एवं अभिनय के साथ दर्शाया गया है, इसके स्पेशल एफक्ट्स आपको उसी कालखंड की झलक दिखा देंगे जबकि ये बाते हो रही है।
क्या है ‘नागबंधम’ की कास्ट?
इस फिल्म में यंग तेलुगू स्टार विराट कर्ण लीड रोल में हैं. वो एक मॉडर्न किरदार के अलावा, भगवान शिव के गेटअप में भी नजर आ रहे हैं. फिल्म में उनके साथ फीमेल लीड रोल में नाभा नतेश हैं. ईशा रेब्बा भी उनके साथ महत्वपूर्ण किरदार में नजर आ रही हैं. जगपति बाबू, मुरली शर्मा और जयप्रकाश जैसे दमदार कलाकारों का भी फिल्म में महत्वपूर्ण रोल है.
रिपोर्ट्स बताती हैं कि ‘नागबंधम’ अपने एक खास सेट के लिए भी चर्चा बटोर चुकी है. मेकर्स ने 10 करोड़ की लागत से हैदराबाद की रामोजी फिल्म सिटी में एक प्राचीन मंदिर का शानदार सेट बनवाया है. इस मंदिर में ‘नागबंधम’ का एक गाना और कई महत्वपूर्ण सीन फिल्माए जाने वाले हैं.
क्या है ‘नागबंधम’
नागबंधम एक प्राचीन प्रतीक है, जिसका उल्लेख विशेष रूप से दक्षिण भारतीय मंदिर वास्तु और आध्यात्मिक परंपराओं में मिलता है। यह शब्द दो भागों से मिलकर बना है—‘नाग’ यानी सर्प और ‘बंधम’ यानी बंधन या संरचना। मंदिर वास्तु में नागबंधम को एक ऐसे ज्यामितीय पैटर्न के रूप में देखा जाता है, जिसमें सर्पाकार आकृतियाँ एक-दूसरे में गुंथी हुई होती हैं। यह केवल सजावटी डिज़ाइन नहीं, बल्कि ऊर्जा संतुलन का प्रतीक माना जाता है।
वास्तु मान्यताओं के अनुसार, यह पैटर्न सकारात्मक ऊर्जा को केंद्रित करता है और नकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को नियंत्रित करता है। सर्प को भारतीय परंपरा में शक्ति, संरक्षण और कुंडलिनी ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। इसलिए नागबंधम को एक ऐसे ऊर्जा-चक्र के रूप में समझा जाता है, जो स्थान को आध्यात्मिक रूप से सुरक्षित बनाता है।































