हाल ही में गाजियाबाद जिले एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमे दरोगा जी को ही ब्लैकमेल किया जा रहा है, अगर मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि यह कानून के दुरुपयोग, झूठे मुकदमों की धमकी और संगठित ब्लैकमेलिंग का गंभीर उदाहरण है। आरोप है कि एक महिला ने प्रेम संबंध बनाकर दरोगा के खिलाफ दुष्कर्म की प्राथमिकी दर्ज कराई, और बाद में समझौते के नाम पर 35 लाख रुपये की मांग की। इस दौरान महिला ने तीन लाख रुपये नकद और 20 हजार रुपये ऑनलाइन भी वसूल लिए। पैसे न देने पर पूरे परिवार को झूठे मामलों में फंसाने और नौकरी से निकलवाने की धमकी दी गई।
जब दरोगा की पत्नी को पूरे मामले की जानकारी हुई तो उन्होंने थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और रेखा त्यागी नाम की महिला को पकड़ा गया। अब सवाल यह है कि भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत महिला पर कौन-कौन सी धाराएँ लग सकती हैं।
1. BNS धारा 308 – जबरन वसूली (Extortion)
इस मामले की सबसे प्रमुख धारा BNS की धारा 308 (जबरन वसूली) है।
क्यों लागू होगी?
- महिला ने दुष्कर्म के मुकदमे और परिवार को झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देकर पैसे मांगे
- धमकी के दबाव में दरोगा से पैसे वसूले गए
- धमकी और डर दिखाकर धन प्राप्त करना स्पष्ट रूप से जबरन वसूली है
👉 सज़ा: कई वर्षों तक कारावास और जुर्माना
👉 महत्वपूर्ण बिंदु: पैसे वास्तव में लिए गए हों या न लिए गए हों, धमकी देकर मांग करना ही अपराध है
2. BNS धारा 351 – आपराधिक धमकी (Criminal Intimidation)
महिला द्वारा पैसे न देने पर पूरे परिवार को झूठे मामलों में फंसाने और नौकरी से निकलवाने की धमकी देना आपराधिक धमकी की श्रेणी में आता है।
क्यों लागू होगी?
- जीवन, मान-सम्मान और आजीविका को नुकसान पहुंचाने की धमकी
- धमकी का उद्देश्य डर पैदा करना और दबाव बनाना
👉 सज़ा: कारावास, जुर्माना या दोनों
👉 यह धारा जबरन वसूली के साथ अलग से लागू होती है
3. BNS धारा 318 – धोखाधड़ी (Cheating)
यदि जांच में यह साबित होता है कि महिला ने शुरू से ही प्रेम संबंध धोखे के इरादे से बनाए, ताकि बाद में झूठा केस कर पैसे ऐंठे जा सकें, तो यह धोखाधड़ी होगी।
क्यों लागू होगी?
- झूठे भरोसे में लेकर संबंध बनाना
- लाभ (पैसे) प्राप्त करने की नीयत
- विश्वासघात (Breach of Trust)
👉 सज़ा: कारावास और जुर्माना
4. BNS धारा 211 (नई संख्या में पुनर्संरचित) – झूठा मुकदमा दर्ज कराना
पुराने IPC की धारा 211 के समकक्ष, BNS में झूठे आपराधिक आरोप लगाने को भी अपराध माना गया है।
क्यों लागू होगी?
- दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराध की झूठी प्राथमिकी
- पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग
- आरोपी को सामाजिक और मानसिक क्षति
👉 सज़ा: वही सज़ा जो झूठे आरोप से आरोपी को हो सकती थी (गंभीर मामलों में कठोर दंड)
5. BNS धारा 228–232 – झूठी गवाही और झूठे साक्ष्य (False Evidence)
यदि महिला ने:
- पुलिस या कोर्ट में झूठे बयान दिए, या
- साक्ष्य गढ़े, या
- किसी को झूठी गवाही देने के लिए मजबूर किया
तो BNS की झूठे साक्ष्य से जुड़ी धाराएँ भी लागू होंगी।
👉 खास तौर पर:
- BNS 228 – झूठे साक्ष्य देना
- BNS 232 – झूठी गवाही के लिए धमकाना
6. BNS धारा 61 / 62 – आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy) – यदि सहयोगी मिले
यदि जांच में यह सामने आता है कि महिला ने:
- किसी वकील
- किसी दलाल
- या किसी अन्य व्यक्ति के साथ मिलकर
यह योजना बनाई थी, तो आपराधिक साजिश की धाराएँ भी जुड़ सकती हैं।
7. आईटी एक्ट और डिजिटल ट्रांजैक्शन से जुड़ी धाराएँ
क्योंकि:
- 20,000 रुपये ऑनलाइन वसूले गए
- डिजिटल माध्यम से धमकी या मैसेज दिए गए
तो आईटी एक्ट के तहत भी धाराएँ जुड़ सकती हैं, जैसे:
- डिजिटल ब्लैकमेल
- इलेक्ट्रॉनिक सबूतों का दुरुपयोग
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
यह केस इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि:
- यह झूठे दुष्कर्म मामलों के दुरुपयोग को उजागर करता है
- कानून पीड़ित महिलाओं की सुरक्षा के लिए है, ब्लैकमेल के लिए नहीं
- सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट पहले ही कह चुके हैं कि झूठे केस भी अपराध हैं
निष्कर्ष
गाजियाबाद का यह मामला स्पष्ट करता है कि यदि कोई व्यक्ति:
- झूठा केस दर्ज कराता है
- धमकी देकर पैसे वसूलता है
- कानून का इस्तेमाल हथियार की तरह करता है
तो वह खुद कानून के कठघरे में खड़ा होगा।
इस प्रकरण में महिला पर BNS की कई गंभीर धाराएँ एक साथ लग सकती हैं—जिनमें जबरन वसूली, आपराधिक धमकी, धोखाधड़ी, झूठा मुकदमा, झूठी गवाही और साजिश शामिल हैं। यदि आरोप साबित होते हैं, तो यह मामला कठोर सज़ा तक जा सकता है।
































