उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के के कई परिषदीय स्कूलों के भवन जर्जर हैं। हजारों दावों के बीच व्यवस्था इतनी बकवास है कि कक्षाआें में कहीं प्लास्टर टूटकर नीचे गिर रहा है, तो कहीं पर छतों की सरिया दिख रही है।कई स्कूलों के हालात यह हैं कि कई भवनों में पानी भी टपक रहा है। बावजूद इसके नौनिहाल यहां के जर्जर भवनों में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। हालांकि विभाग ने पिछले दिनों जर्जर स्कूलों के भवनों का सर्वे कराया था। चिह्नांकन के बाद कुछ स्कूलों के बच्चे दूसरी जगह बनी नई बिल्डिंगों में स्थानांतरित भी कर दिए गए थे। जबकि कई जर्जर भवनों में आज भी कक्षाएं लग रही हैं।
शिक्षक मजबूरन पेड़ों के नीचे बच्चों को बैठाकर पढ़ाई करा रहे हैं। राजस्थान में झालावाड़ जिले के पीपलोदी गांव में चार दशक पुराने सरकारी स्कूल की इमारत की छत का एक हिस्सा ढह गया। हादसे में सात बच्चों की मौत हो गई। कई घायल भी हो गए। इस हादसे ने सभी का ध्यान खींचा है। जिले में भी कई स्कूलों के भवन जर्जर हालत में है। इसके बाद भी वहां पठन-पाठन चल रहा है। बड़े पैमाने पर कायाकल्प अभियान चलने के बाद भी कुछ स्कूलों में यह खतरा मड़रा रहा है। राजस्थान की घटना से सबक लिया जाना चाहिए। ताकि बच्चों और शिक्षकों की जान को खतरा न हो।
शनिवार को पड़ताल में कई स्कूलों के भवन जर्जर मिले हैं। इन्हें मरम्मत व नये भवन निर्माण की जरूरत है। अन्यथा यहां भी पीपलोदी जैसा हादसा हो सकता है।जर्जर दीवारों में बारिश में आई सीलन से बच्चे और शिक्षकों की जान पर बन आई है। वह कक्षाआें के अंदर नहीं जा रहे हैं, ऐसे में कई स्कूलों में पेड़ों के नीचे कक्षाएं लगाकर पढ़ाई कराई जा रही है।
































