पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में ऐसी दिल दहला देने वाली खबरें सामने आई हैं, जहाँ बच्चों को उनकी ही माँ या परिवार के अत्याचार का शिकार बनना पड़ा। छत या बालकनी से गिराकर जान लेने जैसी घटनाएं बेहद सामूहिक होती जा रही हैं। इस ब्लॉग में हम कुछ प्रमुख मामलों को विस्तार से देखेंगे और इसके कारणों, जांच, पुलिस कार्रवाई और सामाजिक संदेश पर चर्चा करेंगे।
घटना क्रम‑वार विवरण
1. बरेली (CB‑गंज), 21 नवंबर 2024
- मांगलिक/प्रेम संबंध की आड़: CBGanj इलाके में रहने वाली अनम ने अपनी 2½ साल की बेटी अमानूर को तीसरी मंज़िल की छत से नीचे फेंक दिया।
- गोपनीय दफन: हत्या की जानकारी पिताजी को सीसीटीवी फूटेज देखकर हुई। अनबुझे कारण बताने के लिए बच्ची को तुरंत दफनाने का प्रयास किया गया था ।
- पुलिस कारवाई: पिता की FIR दर्ज कराने पर पुलिस ने शव exhumed कर पोस्टमार्टम कराया और हत्या व सबूत छुपाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। आरोपी – माँ अनम – को गिरफ्तार किया गया ।
2. लखनऊ (Baghankheda, Mohanlalganj), 28 अगस्त 2024
- मानसिक अस्वस्थता या जानबूझकर? गांव की निवासी सावित ने अस्थायी मानसिक विकार की बात कहते हुए अपनी 2 साल की बेटी को छत से नीचे फेंक दिया। बच्ची ज़िंदा रही और अस्पताल में इलाज चल रहा है ।
- पुलिस रिमांड: सावित को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। FIR में हत्या के प्रयास (Section 109, 75) दर्ज किए गए (The Indian Express)।
3. बलिया, जनवरी 2025
- बहन के झगड़े पर जानलेवा ग़ुस्सा: कृष्णा नगर (Ballia) की 27 साल की Anju Devi ने बहन से विवाद के बाद 9 महीने के बेटे को छत से नीचे फेंक दिया, जिससे उसकी मौत हो गई (www.ndtv.com)।
- जांच एवं रिमांड: पुलिस ने संज्ञान लेकर हत्या की धाराओं में केस दर्ज किया और मां को हिरासत में लिया ।
4. बालिया के बाद – Daman, जनवरी 2025
- दमन की चौथी मंज़िल से मृत्यु: Surat के बाद Daman में एक माँ ने अपने 1 और 3 साल के पुत्रों को 4वीं मंज़िल की बालकनी से फेंक दिया। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई (The Times of India)।
- परिवार विवाद की वजह: विवाहित जीवन संबंधी विवाद का इशारा किया गया, पुलिस ने हत्या के आरोप में मां को गिरफ्तार किया ।
5. बाँद होरर (Meerut – न्यूज़, जून 2025)
- रोमांचित हेड कटर माँ: 17 साल की लड़की की बॉडी नहर से मिली। माँ और परिवार ने bolt‑cutter से गर्दन काट कर शरिर नहर में फेंका, वजह प्रेम‑प्रसंग था (The Times of India)।
- पुलिस एक्शन: पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया और सामूहिक हत्या की धारा में केस चल रहा है ।
6. बाक़ी उत्तर प्रदेश – Baghpat (होनर किलिंग), जून 2025
- छोटे प्रेम‑समाचार से खून: बहुगृह बलात्कार जैसे मामलों के बाद Baghpat से आई खबर में, 21 वर्षीय लड़की के माता-पिता ने प्रेमजीवन के चलते उसे गला घोंट कर मार डाला और गुप्त रूप से रात में उसका अंतिम संस्कार किया (The Times of India)।
- पुलिस तलाशी: पुलिस ने हत्या व आरक्षाओं की पुष्टि की है ।
सम्मोहक विश्लेषण: सामान्य पैटर्न क्या हैं?
| पैटर्न | विवरण |
|---|---|
| आश्रय | घर, छत, बालकनी—अधिकांस घटनाएँ निजी परिसरों में ही होती हैं |
| प्रेरणा | • प्रेम‑प्रसंग (प्रेमिका/प्रेमी)• बेटी/जन्म‑संतानों से असंतोष• परिवार नियंत्रण या सामाजिक मानदंड |
| पहनाव | आम‑तौर पर जानलेवा नाटकीयता, जैसे बल और हथियार |
पुलिस और न्याय विभाग की क्या भूमिका?
- CCTV व वीडियो संभावनाएँ – बरेली, लखनऊ जैसी घटनाओं में दृश्य रिकॉर्डिंग ने प्रमुख सुराग जुटाए।
- पोस्टमार्टम व exhumation – मृतकों की पहचान, मौत की वजह सुनिश्चित करनी पड़ती है।
- धाराओं में चल रही कार्रवाई – 302 (हत्या), 201 (प्रमाण छुपाना), 109, 75 जैसे IPC की धाराओं में मुकदमें दर्ज हो रहे हैं।
- जमानती या गैर‑जमानती रिमांड – आरोपी को मानसिक बीमारी बताकर भी गिरफ्तार किया जाता है (लखनऊ) जबकि मौत वाले मामले में सीधे जेल भेजा जाता है (बलिया, बरेली)।
सामाजिक असर और सरकार की ज़िम्मेदारी
- मानसिक स्वास्थ्य की पहचान और उपचार – घरेलू तनाव या मानसिक विकार संभावित वजह रखते हैं।
- महिलाओं‑बच्चों की सुरक्षा – सामाजिक जागरूकता और सुरक्षा यातायन की आवश्यकता।
- गर्भना अधिकार एवं आत्मनिर्णय – प्रेम‑प्रसंग, शादी या गर्भनिरोधन अधिकार को स्वस्थ और सुरक्षित तरीके से हल करने हेतु समाज में संवाद।
- कानूनी सहायता और त्वरित न्यायिक प्रक्रिया – पीड़ित पक्ष को रणनीतिक समर्थन, राहत और न्याय त्वरित मिल।
निष्कर्ष – ख़त्म नहीं होती माँ की दहशत
उत्तर प्रदेश में हाल के वर्षों में ये दुखद घटनाएँ चौंकाने वाली हैं। चाहे प्रेरणा प्रेम‑उल्फ़त की हो, झगड़े की, मानसिक तनाव की, या “समाज का दबाव” — सबसे बड़े रिश्तों से ही होती है ये हिंसा, जिसका खामियाजा सबसे गरीब, मासूम मानवता के हिस्से होते हैं।
सरकार, पुलिस, समाजनीति, नागरिक—हर स्तर पर जागरूकता, सुरक्षा, और सुधार की ज़रूरत है। ऐसे भयावह अत्याचार दोबारा न हों, इसके लिए:
- उन्नत मानसिक सहायता केंद्र,
- हरलोग पर CCTV की सक्रियता,
- महिलाओं की आर्थिक‑सामाजिक आत्मनिर्भरता,
- और न्याय प्रणाली में त्वरित और पारदर्शी प्रक्रिया —
ये सभी कदम अविलम्ब तन पर लिए जाने चाहिए।
संदर्भ और रिपोर्ट्स
- बरेली (21 नवंबर 2024) – “Woman kills 2.5‑year‑old daughter…” (The Times of India, The Times of India, The Times of India)
- लखनऊ (28 अगस्त 2024) – “Woman throws 2‑year‑old daughter…”
- बलिया (26 जनवरी 2025) – “UP Woman Throws 9‑Month‑Old Baby…” (www.ndtv.com)
- दमन (21 जनवरी 2025) – “Mother throws toddler sons from 4th floor…” (The Times of India)
- मेरठ (7 जून 2025) – “Mother kills 17‑year‑old daughter over affair…” (The Times of India)
- बागपत (20 जून 2025) – “Didn’t want her married in same village…” (The Times of India)

































