भाई, ये मामला पुणे (Where is Pune) के दीनानाथ मंगेशकर हॉस्पिटल का है, जो हाल ही में खबरों में आया। मैं इसे साफ और तथ्यों के आधार पर समझाता हूँ, और तुम्हारे सवालों का जवाब भी देता हूँ।
क्या है ये मामला?
– घटना 28 मार्च 2025 को तनिषा भिसे नाम की एक गर्भवती महिला को प्रसव के लिए पुणे के दीनानाथ मंगेशकर हॉस्पिटल ले जाया गया। वह सात महीने की गर्भवती थी और उसे रक्तस्राव शुरू हो गया था।
– 10 लाख की माँग परिवार का आरोप है कि हॉस्पिटल ने इलाज शुरू करने से पहले 10 लाख रुपये जमा करने को कहा। उनके पास तुरंत इतने पैसे नहीं थे—उन्होंने 2.5 से 3 लाख रुपये देने की पेशकश की, लेकिन हॉस्पिटल ने मना कर दिया।
– देरी और मौत हॉस्पिटल ने भर्ती करने से इनकार किया। परिवार उसे दूसरे हॉस्पिटल (सूर्या हॉस्पिटल) ले गया। वहाँ तनिषा ने दो ज twins को जन्म दिया, लेकिन इलाज में देरी की वजह से 31 मार्च को उसकी मौत हो गई।
– आरोप परिवार और कई लोगों का कहना है कि हॉस्पिटल की “पैसे पहले, इलाज बाद में” वाली नीति की वजह से यह हादसा हुआ। तनिषा के पति सुशांत भिसे, जो बीजेपी विधायक अमित गोरखे के पीए हैं, ने भी हॉस्पिटल पर लापरवाही का आरोप लगाया।
– हॉस्पिटल का जवाब हॉस्पिटल के जनसंपर्क अधिकारी रवि पालेकर ने कहा कि वे इसकी आंतरिक जाँच कर रहे हैं और रिपोर्ट सरकार को देंगे। उनका दावा है कि मीडिया में अधूरी जानकारी फैलाई जा रही है।
ये किस “जाति” के लोगों का हॉस्पिटल है?
– जाति का कोई लेना-देना नहीं दीनानाथ मंगेशकर हॉस्पिटल एक चैरिटेबल मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल है, जो 2001 में शुरू हुआ। इसे मंगेशकर परिवार (लता मंगेशकर और उनके रिश्तेदारों) ने अपने पिता दीनानाथ मंगेशकर की याद में बनवाया था। मंगेशकर परिवार मराठी ब्राह्मण है, लेकिन हॉस्पिटल का मालिकाना या संचालन “जाति” से नहीं, बल्कि एक ट्रस्ट से जुड़ा है।
– ट्रस्ट का उद्देश्य शुरू में इसे गरीबों के लिए सस्ती स्वास्थ्य सेवा देने के लिए बनाया गया था। पहले 5 रुपये में OPD शुरू हुई थी, जो बाद में 10 रुपये हुई। लेकिन आज यह पुणे का एक बड़ा निजी हॉस्पिटल है, जिसमें 800 बेड हैं।
– जाति का सवाल हॉस्पिटल किसी “जाति” का नहीं है। यह एक संस्था है, जो ट्रस्ट के तहत चलती है। यहाँ काम करने वाले डॉक्टर, स्टाफ, और प्रशासन में हर जाति-समुदाय के लोग हो सकते हैं। घटना में जाति का कोई सीधा उल्लेख नहीं है—यह प्रशासनिक नीति और पैसे की माँग का मामला है।
इतने रुपये माँगने वाला किस “जाति” का था?
– कोई व्यक्तिगत नाम नहीं खबरों में यह नहीं बताया गया कि 10 लाख रुपये माँगने वाला कोई खास व्यक्ति था, जिसकी जाति पर चर्चा हो सके। यह हॉस्पिटल प्रशासन का फैसला था—जो कि एक सामूहिक नीति का हिस्सा लगता है। डॉक्टरों ने कथित तौर पर कहा कि ऑपरेशन के लिए 10-20 लाख का खर्चा आएगा, और शुरू में 10 लाख जमा करने को कहा।
– प्रशासन की बात इसमें डॉ. केळकर का नाम आया है, जिन्होंने कथित तौर पर “जितने पैसे हैं, उतने भरो” कहा था। लेकिन उनकी जाति या व्यक्तिगत पहचान की कोई जानकारी नहीं दी गई। यह हॉस्पिटल की व्यवस्था का मामला है, न कि किसी एक शख्स की जाति का।
– तर्क तुम्हारा सवाल शायद व्यंग्य या गुस्से से आया हो, लेकिन सच ये है कि यहाँ जाति से ज्यादा पैसे और नीति की बात है। हॉस्पिटल ने गरीबों की सेवा का दावा किया था, लेकिन इस घटना से उसकी मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।
आज का संदर्भ
– लोग इसे “सवर्ण प्रिविलेज” या “पैसे वाले सिस्टम” से जोड़कर देख रहे हैं, लेकिन यहाँ ये मामला दीनानाथ मंगेशकर हॉस्पिटल की कथित लापरवाही और पैसे की माँग का है, जिसमें एक गर्भवती महिला की जान चली गई। हॉस्पिटल मंगेशकर परिवार (मराठी ब्राह्मण) ने शुरू किया, लेकिन यह किसी “जाति” का नहीं, एक ट्रस्ट का है। रुपये माँगने वाला कोई एक व्यक्ति नहीं, बल्कि हॉस्पिटल प्रशासन था—जिसकी जाति का कोई सबूत नहीं। यह पैसे और नीति का खेल है, न कि जाति का।

































