उत्तर प्रदेश के औरैया जिले मे हाइड्रा चालक हत्याकांड में प्रगति और अनुराग को आजीवन कारावास या फांसी की सजा हो सकती है दोनों का अपराध इतना जघन्य है कोई भी सजा काम है मौत का षड़यत्र रचने वाले को माफ़ी तो मिलेगी नहीं उसके लिए तो फांसी ही न्याय होगा दिलीप हत्याकांड में अभी तक पांच आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। दर्ज मुकदमे में प्रगति व अनुराग को बीएनएस की धारा-3 (5) आजीवन कारावास या फांसी के फंदे तक ले जा सकती है। अधिवक्ता सुरेश कुमार मिश्रा का कहना है कि यह विरलतम से विरलतम और क्रूरतम अपराध है। इस मामले में दिलीप को तड़पा-तड़पाकर मारा गया है।प्रगति ने अपने प्रेमी से मिलकर कांट्रेक्ट किलर से हत्या कराई है।
बीएनएस की धारा 3 (5) यह कहती है कि सभी लोगों ने एक राय होकर अपराध किया है। यह नहीं देखा जाएगा कि किसने क्या किया, बल्कि सभी को समान रूप से उत्तरदायी माना जाएगा। इसमें फांसी की सजा भी हो सकती है। न्यूनतम सजा आजीवन कारावास है। अगर प्रगति के घर वाला कोई पैरवी नहीं करता तो उसे न्यायिक व्यवस्था के तहत सरकारी वकील उपलब्ध कराया जाएगा। इसमें प्रेमिका प्रगति व प्रेमी अनुराग समेत शूटर रामजी नागर, दुर्लभ यादव व शिवम शामिल हैं। वकीलों के मुताबिक प्रगति व अनुराग पर लगाई गई बीएनएस की धारा-3 (5) बहुत ही गंभीर है। फांसी या फिर आजीवन कारावास की सजा दोनों को सुनाई जा सकती है। दोनों आरोपियों को फांसी होनी चाहिए फ़िलहाल पुलिस मामले की जाँच कर रही है

































