Chitrakoot News – मकर संक्रांति का पर्व सभी हिंदुओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है। तमिलनाडु में इसे पोंगल नामक उत्सव के रूप में जाना जाता हैं जबकि कर्नाटक, केरल, तेलंगाना तथा आंध्र प्रदेश में इसे केवल संक्रांति ही कहते हैं। बिहार के कुछ जिलों में यह पर्व ‘तिला संक्रांत’ नाम से भी प्रसिद्ध है।
मकर संक्रान्ति पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायण भी कहते हैं। 14 जनवरी के बाद से सूर्य उत्तर दिशा की ओर अग्रसर (जाता हुआ) होता है। इसी कारण इस पर्व को ‘उतरायण’ (सूर्य उत्तर की ओर) भी कहते है। वैज्ञानिक तौर पर इसका मुख्य कारण पृथ्वी का निरंतर 6 महीनों के समय अवधि के उपरांत उत्तर से दक्षिण की ओर वलन कर लेना होता है। और यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है
उत्तर प्रदेश के चित्रकूट मे मकर संक्राति पर्व का सोमवार को मुख्य स्नान होने के कारण के रामघाट व यहां तक पहुंचने वाले मार्ग पर पुलिस सुरक्षा बढ़ा दी गई है। लगभग डेढ़ लाख श्रद्धालुओं के मंदाकिनी में डुबकी लगाने की संभावना है। इसके लिए यातायात संचालन की व्यवस्था में परिवर्तन किया गया है। धर्मनगरी में मकर संक्रांति पर्व को शांति से निपटाने के लिए जिला प्रशासन ने 10 सेक्टर बनाए हैं।
बेड़ीपुलिया व शिवरामपुर से रामघाट तक का मार्ग सुबह 7 बजे से 10 बजे तक वन वे किया जाएगा। इसके बाद दोनों तरफ के मार्ग खुलेंगे। भारी वाहनों को प्रवेश मेला क्षेत्र में नहीं होगा। खोही, बिहारा व रामशैय्या की ओर सुबह से लेकर शाम तक भारी वाहनों का प्रवेश बंद रहेगा। सिर्फ टैंपो ई रिक्शा, बाइक व छोटे चार पहिया वाहन गुजरेंगे। इसकी तैयारी को लेकर डीएम अभिषेक आनंद व एसपी अरुण कुमार सिंह ने खुद पूरे मार्ग का भ्रमण किया।

































