बकेवर में सट्टे का अवैध कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है, और यह स्थानीय पुलिस के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। सट्टेबाजी के इस अवैध धंधे ने कई युवाओं और परिवारों को बर्बादी की कगार पर ला खड़ा किया है, बावजूद इसके पुलिस इस पर अंकुश लगाने में असफल हो रही है।
हालांकि, कुछ समय पहले पुलिस ने इस कारोबार पर रोक लगाने के लिए प्रयास किए थे। तत्कालीन सीओ क्राइम एस.एन. वैभव पाण्डेय ने अपनी टीम के साथ बकेवर क्षेत्र में सट्टाकिंग सलीम और निन्हे को सट्टेबाजी करते हुए गिरफ्तार किया था। उस समय पुलिस की सख्ती के चलते सट्टे के कारोबार पर अंकुश लगा था, लेकिन वर्तमान में यह अवैध धंधा फिर से जोर पकड़ चुका है।
बकेवर के विभिन्न इलाकों में खुलेआम सट्टेबाजी के नंबर लिखे जा रहे हैं, और यहां तक कि व्हाट्सएप पर भी सट्टे के नंबर भेजने की सुविधा दी जा रही है। सट्टाकिंग सीटू गुप्ता अब इस अवैध कारोबार का नया बड़ा नाम बन चुका है, जो युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है। एक रुपये को 80 गुना करने के लालच में कई लोग इस अवैध गतिविधि में फंसते जा रहे हैं, और उनके हंसते-खेलते घर बर्बादी की ओर बढ़ रहे हैं।
सट्टाकिंग और उसके सहयोगियों ने हर जगह पैसों का लेनदेन कर मजबूत सांठगांठ बना रखी है, जिसके चलते सट्टे का कारोबार बिना किसी डर के फल-फूल रहा है। बकेवर की छोटी-छोटी गलियों में सट्टेबाजी का खेल खुलेआम चल रहा है, लेकिन पुलिस की कार्रवाई अभी तक नाकाफी साबित हुई है।
अब सवाल यह है कि क्या पुलिस और उनके वरिष्ठ अधिकारी इस अवैध कारोबार पर नियंत्रण कर पाएंगे? क्या वे युवाओं के भविष्य और परिवारों को इस घातक जाल से बाहर निकालने में सफल होंगे, या यह अवैध धंधा इसी तरह बेरोकटोक चलता रहेगा? सट्टेबाजी के इस बढ़ते कारोबार ने न सिर्फ कानूनी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, बल्कि समाज को भी गहरे संकट में डाल दिया है।



















