आज के डिजिटल दौर में अगर आप ऑनलाइन पढ़ाने का काम कर रहे हैं, तो यह बहुत अच्छी बात है कि आप UrbanPro, Unacademy, Udemy जैसे बड़े-बड़े प्लेटफॉर्म पर सफलतापूर्वक काम कर रहे हैं। लेकिन आपको यह भी समझना होगा कि सिर्फ इन पोर्टल्स पर निर्भर रहना लंबे समय में आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है।
1. पोर्टल्स का फायदा, लेकिन सीमाएं भी
UrbanPro, Unacademy, Udemy जैसे पोर्टल आपको शुरुआती समय में स्टूडेंट्स दिला देते हैं। उनके पास पहले से लाखों यूज़र्स होते हैं, जिससे आपका कोर्स आसानी से लोगों तक पहुंच जाता है।
लेकिन…
- आपके स्टूडेंट्स आपको पोर्टल के ब्रांड से जानते हैं, आपके अपने नाम से नहीं।
- उनका डेटा, ईमेल, फ़ोन नंबर आपके पास नहीं होता।
- हर नए स्टूडेंट के लिए आपको उनके नियम और कमीशन मानने पड़ते हैं।
यानि आप मेहनत तो कर रहे हैं, लेकिन ब्रांडिंग और स्टूडेंट्स का कंट्रोल आपके पास नहीं है — वो पोर्टल के पास है।
2. स्टूडेंट का सर्च बिहेवियर – आपका खोया हुआ मौका
जब कोई स्टूडेंट आपको किसी पोर्टल पर देखता है और आपके प्रोफ़ाइल से प्रभावित होता है, तो अक्सर वह गूगल पर आपका नाम सर्च करता है ताकि आपके बारे में और जानकारी ले सके।
अब दो स्थिति हो सकती हैं:
- अगर गूगल पर उसे आपकी अपनी वेबसाइट मिलती है, तो उसके मन में आपके प्रति भरोसा कई गुना बढ़ जाता है।
- अगर गूगल पर आपके बारे में कुछ नहीं मिलता, तो वह वापस पोर्टल पर जाकर आपसे जुड़ता है, और हमेशा पोर्टल के ज़रिए ही आपसे जुड़ेगा।
इसका मतलब –
आपके पास कभी अपना स्वतंत्र पहचान (Identity) या ब्रांड नहीं बन पाएगा, और आप जीवन भर इन पोर्टल्स पर निर्भर रहेंगे।
3. वेबसाइट – आपका डिजिटल घर और स्थायी पहचान
एक पर्सनल टीचिंग वेबसाइट का मतलब है:
- एक ऐसी जगह जहां आपके सारे कोर्स, क्वालिफिकेशन, अनुभव, सफल छात्रों की कहानियां और आपके पढ़ाने का तरीका एक साथ उपलब्ध हो।
- आपके नाम से बनी एक स्थायी पहचान जो पोर्टल बदलने या बंद होने पर भी बनी रहे।
- छात्रों से डायरेक्ट कनेक्शन – बिना किसी कमीशन या बीचवाले के।
- ब्लॉग, नोट्स, फ्री वीडियो, टेस्ट सीरीज़ जैसी चीज़ें डालकर आप और ज्यादा स्टूडेंट्स को आकर्षित कर सकते हैं।
4. SEO – स्टूडेंट पाने का बेहतरीन तरीका
SEO (सर्च इंजन ऑप्टिमाइज़ेशन) का मतलब है कि जब लोग गूगल पर “Best English Teacher in Delhi” या “IIT JEE Maths Online Classes” जैसे शब्द सर्च करें, तो आपकी वेबसाइट पहले पन्ने पर दिखाई दे।
इससे फायदे:
- आपको हर महीने नए स्टूडेंट्स मिलते रहेंगे।
- आपको किसी पोर्टल की फीस या कमीशन नहीं देनी पड़ेगी।
- आपके पास खुद का स्टूडेंट्स का डेटाबेस बन जाएगा, जिसे आप कभी भी कोर्स ऑफ़र कर सकते हैं।
- आप एक रेफेरल स्कीम भी चला सकते है, क्युकी यहाँ आपकी ही मर्जी चलेगी
5. लंबी अवधि में ब्रांड बनाना
जितना ज़्यादा आपका नाम और वेबसाइट इंटरनेट पर दिखेगा, उतना ही:
- आपके कोर्स की कीमत आप खुद तय कर पाएंगे, पोर्टल नहीं।
- लोग आपको एक “ब्रांड” के रूप में पहचानेंगे, न कि सिर्फ “UrbanPro के टीचर” के रूप में।
- आप अलग-अलग इनकम सोर्स बना सकते हैं – जैसे लाइव क्लास, रिकॉर्डेड कोर्स, ई-बुक्स, वर्कशॉप आदि।
6. एक साधारण उदाहरण
मान लीजिए आपके पास अभी 100 स्टूडेंट हैं जो UrbanPro के जरिए आए हैं।
अगर कल UrbanPro अपनी पॉलिसी बदल दे या आपका अकाउंट हटा दे, तो आप उन 100 में से किसी से भी संपर्क नहीं कर पाएंगे, क्योंकि आपके पास उनका डायरेक्ट डेटा नहीं है।
लेकिन अगर वही स्टूडेंट आपकी वेबसाइट के सब्सक्राइबर हैं, तो आप उन्हें तुरंत डायरेक्ट मैसेज या ईमेल करके अपनी क्लास ऑफर कर सकते हैं – चाहे पोर्टल हो या न हो।
यहाँ पर हमने “पोर्टल पर निर्भरता” बनाम “अपनी वेबसाइट + SEO की आज़ादी” का सीधा तुलना चार्ट तैयार कर दिया है, जो आपको एक नज़र में साफ साफ फर्क समझा देगा।
| पहलू | सिर्फ पोर्टल पर निर्भरता | अपनी वेबसाइट + SEO |
|---|---|---|
| पहचान (Identity) | स्टूडेंट आपको पोर्टल के नाम से जानता है (जैसे “UrbanPro के टीचर”) | स्टूडेंट आपको आपके अपने नाम और ब्रांड से पहचानता है |
| स्टूडेंट डेटा | डेटा पोर्टल के पास, आपके पास डायरेक्ट एक्सेस नहीं | डेटा आपके पास, आप कभी भी संपर्क कर सकते हैं |
| कमाई (Income) | पोर्टल के कमीशन और नियमों पर निर्भर | आप अपनी कीमत खुद तय करते हैं, पूरा पेमेंट आपके पास |
| ब्रांड बिल्डिंग | आपका ब्रांड दब जाता है, पोर्टल का ब्रांड आगे रहता है | आपका नाम, लोगो और ब्रांड मार्केट में मजबूत होता है |
| मार्केटिंग कंट्रोल | पोर्टल तय करता है आपका कोर्स कैसे दिखेगा | आप तय करते हैं कि कोर्स, कंटेंट और ऑफ़र कैसे दिखें |
| लंबी अवधि की सुरक्षा | अगर पोर्टल बंद हो गया/पॉलिसी बदल गई तो सब खो जाएगा | वेबसाइट आपके कंट्रोल में है, कोई बीचवाला नहीं |
| स्टूडेंट सोर्स | सिर्फ पोर्टल से स्टूडेंट मिलते हैं | गूगल सर्च, सोशल मीडिया, रेफ़रल, डायरेक्ट लीड्स |
| लागत (Cost) | हर बार कमीशन, लिस्टिंग फीस | एक बार वेबसाइट बनवाने और SEO करने का खर्च, फिर सालों फायदा |
| आज़ादी (Freedom) | पूरी तरह पोर्टल पर निर्भर | 100% स्वतंत्र, अपने नियम खुद बनाएं |
निष्कर्ष
पोर्टल्स आपके बिज़नेस का अच्छा सहारा हैं, लेकिन सिर्फ उन पर निर्भर रहना आपकी आज़ादी और पहचान को सीमित कर देता है।
अपनी वेबसाइट और SEO से आप:
- स्वतंत्र पहचान बनाते हैं।
- छात्रों से डायरेक्ट जुड़ते हैं।
- अपना खुद का ब्रांड तैयार करते हैं।
- किसी भी एक प्लेटफॉर्म पर निर्भर नहीं रहते।
वेबसाइट और SEO एक ऐसा लाइफटाइम एसेट है जो सालों तक आपको स्टूडेंट्स, नाम और स्थिर आय देता रहेगा — चाहे मार्केट में कितनी भी प्रतिस्पर्धा क्यों न हो।

































