आज देश में ऐसे हालत बन रहे है जिनका हवाला देकर पहले कहा जाता था की देश में जातिवाद है, छुआछूत है, एक वर्ग दूसरे वर्ग की छाया भी नहीं पड़ने देना चाहता था, एक वर्ग के लिए रहने की जगह अलग थी, पानी का कुआ अलग था, और शायद स्कूल भी अलग ही होंगे, सोच कर देखिये एकबार क्या वर्तमान का क़ानूनी संरक्षण एक वर्ग को मजबूर नहीं कर रहा है दूरिया बनाने को ?
सर्कार पहले scst एक्ट लाती है जिसमे 90 प्रतिशत मामले झूठे निकलते है, लेकिन जबतक सच का पता चलता है उस टाइम काल को कौन बापस देगा, उस समयकाल में जो यातना उस व्यक्ति और उसके परिवार ने झेली है उसका क्या ? सरकारों को इस पीड़ा या दर्द की कोई परवाह नहीं है, यहाँ तक की सर्वोच्च न्यायलय जो मौलिक अधिकारों और संवैधानिक अधिकारों का संरक्षण करने का काम करता है वो भी चुप है।
इसके बाद UGC आया जो कहता है शिक्षण संस्थानों में scstobc के भेदभाव करने वाले पर कार्यवाही होगी, तो सोच कर बताओ अब बचा कौन ? सामान्य वर्ग का युवा, क्युकी मुस्लिम समुदाय अल्पसंख्यक होने का फायदा उठा लेगा लेकिन सामान्य वर्ग का जीना मुश्किल होगा, क्युकी भेदभाव की कोई परिभाषा नहीं है, और न ही इसको परिभासित किया जा सकता है, दूसरी तरफ ये गैर संवैधानिक कानूनों में खुद को निर्दोष साबित करने की जिम्मेदारी भी सामान्य वर्ग के ऊपर होगी, जो की वास्तव में नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत की सर्वथा विरुद्ध है, क्युकी झूठा आरोप लगाने वाले आरोप लगा कर मजा मारेंगे और सामान्य वर्ग का व्यक्ति व्यर्थ में परेशां होगा
दूरगामी समाधान या घूमता चक्र
सामान्य वर्ग या सवर्ण ये ऐसा जनसमूह है जिसने कभी किसी व्यवस्था का विरोध नहीं किया वल्कि उस व्यवस्था से तटस्थ रहकर कोई न कोई विकल्प खोजा, जैसे जब सरकारों ने जमींदारी छीनी तो इसने व्यापार शुरू किया, सरकारी नौकरियों में आरक्षण के कारन सरकारी नौकरीओ से बहार हुए तो प्राइवेट सेक्टर शुरू कर लिया, शिक्षा में आरक्षण के कारन पढ़ने में दिक्कत आयी तो प्राइवेट स्कूल कॉलेज खोले, प्राइवेट हस्पताल खोले, यानि सर्कार के सामानांतर व्यवस्था करके स्वयं को स्थापित कर ही लिया, लेकिन अब जो ये कानून ऐसे ऐसे बन रहे है तो इसका भी समाधान होगा की सवर्ण ऐसे क्षेत्रो को संरक्षित करेगा जिसमे ऐसे लोग न आये जो किसी भी कारण से उनका जीना मुश्किल कर पाए।
अंतिम हल
सरकार कानून बना कर किसी का हृदय परिवर्तन नहीं कर सकती है, किसी से प्रेम करने को वाध्य नहीं कर सकती है, मजबूर कर सकती है लेकिन वो भी अल्पकालिक, क्युकी हर समस्या का समाधान आज नहीं तो कल निकलेगा ही, लेकिन एकतरफ अमानवीय और गैर संवैधानिक कानून समाज के दो वर्गों के बीच कभी का खत्म होने वाली दूरिया जरूर ले आएगी, अपनी स्वतंत्रता सभी को प्रिय है, और मै क्यों चाहुगा की कोई एकतरफ अमानवीय और गैर संवैधानिक कानून का सहारा लेकर मेरी स्वतंत्रता बाधित करे, तो ऐसे में मै उन सभी व्यक्तियों से दुरी बना लूंगा जिनको एकतरफ अमानवीय और गैर संवैधानिक कानून से संरक्षण मिलता है, यही अंतिम विकल्प है मेरे पास




















