हिंदू कोड बिल, जिसे स्वतंत्र भारत में 1950 के दशक में लागू करने की कोशिश की गई, एक ऐसा विधेयक था जिसने हिंदू समाज को गहरे स्तर पर प्रभावित किया। यह बिल डॉ. भीमराव आंबेडकर, जो उस समय भारत के कानून मंत्री थे, के नेतृत्व में तैयार किया गया था। इस बिल का दावा था कि यह हिंदू समाज में महिलाओं की स्थिति को बेहतर करेगा, लेकिन कई लोगों का मानना है कि यह हिंदुओं के खिलाफ एक सुनियोजित षड्यंत्र था। यह बिल केवल हिंदू समुदाय (जिसमें सिख, जैन और बौद्ध शामिल थे) पर लागू था, जबकि अन्य समुदायों जैसे मुस्लिम, ईसाई, पारसी आदि को इससे बाहर रखा गया। यदि डॉ. आंबेडकर वास्तव में सभी महिलाओं के कल्याण के लिए काम करना चाहते थे, तो उन्होंने सभी समुदायों की महिलाओं को शामिल क्यों नहीं किया? इसका नाम ‘भारतीय महिला कोड बिल’ क्यों नहीं रखा गया? और सबसे महत्वपूर्ण, जब आंबेडकर स्वयं हिंदू धर्म को स्वीकार नहीं करते थे और इसे लेकर शर्मिंदगी महसूस करते थे, तो वे हिंदू धर्म को प्रगति का मार्ग कैसे दिखा सकते थे? यह लेख इस तर्क को प्रस्तुत करता है कि हिंदू कोड बिल हिंदू विवाह और पारिवारिक संस्था को कमजोर करने का एक सुनियोजित प्रयास था।
हिंदू कोड बिल का स्वरूप और उद्देश्य
हिंदू कोड बिल में कई प्रावधान थे, जैसे बहुविवाह पर प्रतिबंध, तलाक का अधिकार, संपत्ति में महिलाओं को हिस्सा, और अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा देना। सतह पर ये प्रावधान महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए थे, लेकिन गहराई से देखें तो यह हिंदू समाज की पारंपरिक संरचना, विशेष रूप से विवाह और परिवार की संस्था को तोड़ने का प्रयास था। हिंदू धर्म में विवाह को एक पवित्र बंधन माना जाता है, जो सात जन्मों तक चलता है। लेकिन इस बिल ने तलाक को आसान बनाकर और संपत्ति के अधिकार देकर परिवारों में विभाजन को बढ़ावा दिया। यह हिंदू समाज की एकता और सामाजिक ढांचे को कमजोर करने का प्रयास था।
केवल हिंदू महिलाओं पर ध्यान क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि डॉ. आंबेडकर का उद्देश्य महिलाओं का भला करना था, तो उन्होंने केवल हिंदू महिलाओं को ही क्यों चुना? उस समय मुस्लिम, ईसाई, सिख, जैन, और अन्य समुदायों में भी महिलाओं की स्थिति अच्छी नहीं थी। उदाहरण के लिए, मुस्लिम समुदाय में तीन तलाक और बहुविवाह जैसी प्रथाएं थीं, जो महिलाओं के अधिकारों का हनन करती थीं। ईसाई समुदाय में भी तलाक और संपत्ति के अधिकारों में असमानता थी। फिर भी, हिंदू कोड बिल ने इन समुदायों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया। यह स्पष्ट रूप से हिंदू समाज को लक्षित करने का प्रयास था। यदि आंबेडकर का इरादा सभी महिलाओं के कल्याण का था, तो वे एक समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड) की वकालत करते, जो सभी धर्मों की महिलाओं को समान अधिकार देता। लेकिन ऐसा न करके, उन्होंने केवल हिंदू समाज को निशाना बनाया, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या यह हिंदू धर्म की नींव को कमजोर करने का प्रयास था?
आंबेडकर का हिंदू धर्म के प्रति दृष्टिकोण
डॉ. आंबेडकर का हिंदू धर्म के प्रति रवैया हमेशा से विवादास्पद रहा है। उन्होंने हिंदू धर्म की कई प्रथाओं, विशेष रूप से जाति व्यवस्था, की कड़ी आलोचना की थी। 1956 में, उन्होंने सार्वजनिक रूप से हिंदू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म स्वीकार किया और कहा कि उन्हें हिंदू होने पर शर्मिंदगी महसूस होती है। ऐसे में, यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब वे हिंदू धर्म को प्रगति का मार्ग नहीं मानते थे, तो वे इसके लिए सुधार क्यों लाना चाहते थे? कई लोग मानते हैं कि हिंदू कोड बिल के माध्यम से आंबेडकर का मकसद हिंदू धर्म की परंपराओं, विशेष रूप से विवाह और परिवार की संस्था, को कमजोर करना था। हिंदू धर्म में परिवार सामाजिक ढांचे की रीढ़ है, और इस बिल ने तलाक, संपत्ति विभाजन और अंतरजातीय विवाह जैसे प्रावधानों के माध्यम से इस रीढ़ को तोड़ने की कोशिश की।
हिंदू विवाह और पारिवारिक संस्था पर हमला
हिंदू धर्म में विवाह को एक धार्मिक और सामाजिक बंधन माना जाता है, जो न केवल दो व्यक्तियों, बल्कि दो परिवारों को जोड़ता है। हिंदू कोड बिल ने इस पवित्र बंधन को कमजोर करने का काम किया। तलाक के प्रावधान ने विवाह की स्थायित्व को चुनौती दी, जिससे परिवारों में विघटन की संभावना बढ़ी। संपत्ति में महिलाओं को हिस्सा देना, जो सतह पर सशक्तीकरण का कदम लगता है, वास्तव में पारिवारिक संपत्ति के विभाजन को बढ़ावा देता था। इससे संयुक्त परिवार की अवधारणा कमजोर हुई, जो हिंदू समाज की एकता का आधार थी।
इसके अलावा, अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहन देना भी हिंदू समाज की पारंपरिक संरचना को तोड़ने का प्रयास था। हिंदू समाज में जाति व्यवस्था, चाहे वह कितनी भी विवादास्पद हो, सामाजिक संगठन का एक हिस्सा थी। इस बिल ने इसे कमजोर करने की कोशिश की, जिसे कई हिंदू संगठनों, जैसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और हिंदू महासभा, ने हिंदू धर्म पर हमले के रूप में देखा।
अन्य समुदायों को छूट क्यों?
मुस्लिम, ईसाई और अन्य समुदायों को इस बिल से बाहर रखना इस षड्यंत्र का सबसे बड़ा सबूत है। यदि आंबेडकर का इरादा सभी महिलाओं के लिए समानता लाना था, तो उन्होंने मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से मुक्ति क्यों नहीं दिलाई? या ईसाई महिलाओं को संपत्ति और तलाक के अधिकार क्यों नहीं दिए? यह स्पष्ट है कि हिंदू समाज को विशेष रूप से निशाना बनाया गया। मुस्लिम समुदाय में शरियत कानूनों का पालन होता था, और सरकार ने इसमें हस्तक्षेप से बचने का फैसला किया। लेकिन यह तर्क कमजोर है, क्योंकि यदि सुधार का उद्देश्य था, तो सभी समुदायों को शामिल करना चाहिए था। हिंदू समाज, जो भारत की बहुसंख्यक आबादी था, को ही सुधार के नाम पर कमजोर करने की कोशिश की गई।
नामकरण का सवाल
हिंदू कोड बिल का नाम ही इसके इरादों को उजागर करता है। यदि यह बिल सभी महिलाओं के कल्याण के लिए था, तो इसका नाम ‘भारतीय महिला कोड बिल’ क्यों नहीं रखा गया? ‘हिंदू’ शब्द का उपयोग स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि यह केवल हिंदू समाज को लक्षित करता था। यह नामकरण इस बात का प्रमाण है कि बिल का उद्देश्य हिंदू धर्म की परंपराओं को बदलना या कमजोर करना था, न कि पूरे भारतीय समाज में सुधार लाना।
आंबेडकर का इस्तीफा: एक दिखावा?
कई लोग मानते हैं कि आंबेडकर का 1951 में हिंदू कोड बिल के पारित न होने पर इस्तीफा देना एक दिखावा था। यह उनके हिंदू-विरोधी एजेंडे को छिपाने का प्रयास हो सकता था। यदि वे वास्तव में सभी महिलाओं के कल्याण के लिए काम करना चाहते थे, तो वे एक समान नागरिक संहिता की वकालत करते और सभी समुदायों को शामिल करते। लेकिन ऐसा न करके, उन्होंने केवल हिंदू समाज को निशाना बनाया, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या यह एक सुनियोजित षड्यंत्र था।
हिंदू कोड बिल, जो सतह पर हिंदू महिलाओं के सशक्तीकरण का प्रयास लगता था, वास्तव में हिंदू विवाह और पारिवारिक संस्था को कमजोर करने का एक सुनियोजित षड्यंत्र था। डॉ. आंबेडकर, जो स्वयं हिंदू धर्म को स्वीकार नहीं करते थे, ने इस बिल के माध्यम से हिंदू समाज की नींव को हिलाने की कोशिश की। केवल हिंदू समुदाय को लक्षित करना, अन्य समुदायों को छूट देना, और बिल का नाम ‘हिंदू कोड बिल’ रखना इसके इरादों को स्पष्ट करता है। यह बिल हिंदू समाज की एकता, परिवार और विवाह की पवित्रता को कमजोर करने का प्रयास था, और इसे हिंदुओं के खिलाफ एक षड्यंत्र के रूप में देखा जाना चाहिए।

































