Ambrish Kumar

Ambrish Kumar

अम्बरीष श्रीवास्तव सूचना एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में दो दशक से अधिक का अनुभव रखते हैं। तकनीकी विशेषज्ञता के साथ-साथ, उनकी सोच सामाजिक सुधार, राष्ट्रीय विकास, न्याय व्यवस्था और प्रशासन के प्रभावी संचालन को लेकर भी अत्यंत समर्पित और दूरदर्शी रही है। वकालत की पढ़ाई पूर्ण करने के उपरांत उन्होंने कानून, समाज, शासन एवं समसामयिक विषयों पर लेखन कार्य आरंभ किया है, जो विचारशीलता, तर्क और जनहित के सरोकारों से परिपूर्ण होता है।

सवर्णों का दर्द : आरक्षण, जातिवाद और दोहरे मापदण्डों की सच्चाई

आज़ादी के 75 साल बाद भी भारतीय समाज में “समानता” और “जातिवाद” की बहस खत्म नहीं हुई है। लेकिन एक अजीब विडम्बना यह है...

मनुस्मृति बनाम संविधान: जन्म-आधारित पहचान का असली सच

भारत की सामाजिक-राजनीतिक बहस में दो शब्द बार-बार उभरते हैं — मनुस्मृति और संविधान। एक को “ब्राह्मणवादी शोषण का प्रतीक” कहकर गाली दी...

आज का लोकतंत्र कुत्तों पर मेहरबान और हिंदुओं पर तंज कसता हुआ

भारत का लोकतंत्र और न्यायपालिका अक्सर अपनी संवेदनशीलता और करुणा पर गर्व करती है। लेकिन क्या यही संवेदनशीलता और करुणा...

संयुक्त परिवार को तोड़कर उपभोक्ता बनाया गया भारत को

पत्नी की सेवा और लक्ष्मी-विष्णु का वास : शास्त्र और लोकमान्यता

भारतीय संस्कृति में गृहस्थ जीवन को सबसे महत्वपूर्ण आश्रम माना गया है। वेदों, उपनिषदों और पुराणों ने गृहस्थ को धर्म,...

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