उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में बिधूना कस्बे में प्राइवेट स्कूलों बाले बच्चो को ऑटो रिक्सा में जबरन ठूंसकर बैठाते है ऐसे में बच्चो की जान को खतरे में डालते है हर जगह ऑटो व् रिक्से वालों का यही हाल है कस्बा में इंग्लिश व हिंदी माध्यम के 15 से अधिक स्कूलों का संचालन हो रहा है। ऐसे में स्कूल प्रबंधकों के पास वाहन उपलब्ध न होने पर अभिभावकों को ही अपने संसाधन से स्कूल भेजने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अभिवावक भी पैसों के लालच में अपने लाडलों को मानकविहीन ई-रिक्शों से स्कूल भेजते हैं। ऐसे ई-रिक्शे, जिसमें न तो बच्चों की सुरक्षा के लिए जाली लगी है न ही ई-रिक्शा चालकों की गति क्षमता पर प्रतिबंध है।
अधिक बच्चों को बैठाकर सड़कों पर फरार्ट भरते देखे जा रहे हैं। इससे हादसे की आशंका बनी रहती है। स्कूल प्रबंधन के साथ ही अभिभावक भी इसमें लापरवाही दिखा रहे हैं। कस्बे में कई स्कूलों के वाहनों में बच्चे तो होते हैं, लेकिन वह किस स्कूल के हैं इसका जिक्र वाहनों पर नहीं होता। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि वाहन पर स्कूल का नाम और फोन नंबर जरूर होना चाहिए। इसके अलावा कई प्राइवेट स्कूलों के वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चों को भरकर ले जाया जाता है।
अभिभावक भी यह सब कुछ देखकर मौन हैं, क्योंकि स्कूल वाहन चालक को मना किया तो उनके बच्चे स्कूल कैसे जाएंगे, यह सोचकर वह भी चुप्पी साध लेते हैं, लेकिन कभी हादसा हो गया तो उसका जिम्मेदार कौन होगा। यदि स्कूल वाहन पर नाम नंबर लिखा हो तो कोई हादसा होने पर कम से कम स्कूल में फोन कर सूचित तो किया जा सकता है। इसके अलावा वाहनों में फर्स्ट एड बॉक्स भी नहीं है।इस पर रोक लगाने के लिए प्रशासन के इंतजाम भी फीके हैं। बच्चों को स्कूल ले जाने वाले इन ई-रिक्शा, ऑटो-रिक्शा व वैन आदि वाहनों में प्रशिक्षित चालक होने चाहिए, लेकिन ऐसा नजर नहीं आता।

































